02-03-2025

College Profile

, महाविद्यालय का इतिहास

गुलाब सिंह हिंदू महाविद्यालय की स्थापना स्वनामधन्य पूजनीय स्वo रानी कृष्णा कुमारी जी ने अपनी संपूर्ण चल अचल संपत्ति देकर अपने पति स्वर्गीय राजा गुलाब सिंह जी की युवावस्था में आकस्मिक निधन के बाद उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाने हेतु सन 1962 ई को अपने चांदपुर स्थित भवन में की थी। विकास और विस्तार को ध्यान में रखकर 6 दिसंबर 1965 को इसे वर्तमान स्थल पर स्थानांतरित किया गया। रानी साहिबा अपनी आखिरी सांस तक महाविद्यालय के विकास में एक तपस्विनी की तरह समर्पित रही। स्वर्गीय रानी कृष्णा कुमारी जी महाविद्यालय की संस्थापिका एवं महाविद्यालय की प्रबंध समिति की आजीवन अध्यक्षा भी रही। 20 सितंबर सन 1979 को रानी जी ने महाविद्यालय के अतिथि भवन में अपना शरीर त्यागा। उन्होंने अपनी रजिस्ट्री डीड के पर नंबर 2 के अनुरूप अपने निकटतम संबंधी परम स्नेही चौधरी पृथ्वीराज सिंह को तथा उनके बाद उनके सुयोग्य पुत्र कुंवर महिपाल सिंह को महाविद्यालय प्रबंधन की बागडोर सौंपी थी। कुंवर महिपाल सिंह जी जीवन पर्यंत महाविद्यालय की प्रबंध समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे जिन्हें प्रकृति के क्रूर हाथों ने 10 दिसंबर 2009 को हमसे छीन लिया। उनके उपरांत उनके स्थान पर परम श्रद्धेय बाबू बालचरण सिंह जी, निवासी मोरना महाविद्यालय की प्रबंध समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष व उपाध्यक्ष रहे। दिनांक 31.08.2011 से स्वर्गीय कुंवर महिपाल सिंह के सुयोग्य कनिष्ठ पुत्र कुंवर धीरेंद्र प्रताप सिंह आजीवन अध्यक्ष है जिनकी अध्यक्षता में गठित प्रबंध समिति महाविद्यालय के सुप्रबंधन एवं चहुंमुखी विकास को समर्पित है।

रानी कृष्णा कुमारी जी द्वारा रोपा गया शिक्षा का वह नाना पौधा आज तक विकसित होकर वटवृक्ष बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है तथा संपूर्ण चांदपुर क्षेत्र में उच्च शिक्षा का सर्वसुलभ प्रमुख केंद्र बना हुआ है। महाविद्यालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली से 2(F) एवं 12(B) के अंतर्गत स्थाई रूप से मान्यता प्राप्त है। महाविद्यालय उत्तर प्रदेश शासन से भी स्थाई रूप से अनुदानित/मान्यता प्राप्त है। अपनी स्थापना से लेकर 1975 तक यह महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश तथा 1976 से 2024 तक महात्मा ज्योतिबा फूले रोहिलखंड विश्वविद्यालय बरेली उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध रहा। वर्तमान में यह महाविद्यालय गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय मुरादाबाद उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध है। इसके सभी पाठ्यक्रम पूर्णतया विधि मान्य है। प्रारंभिक वर्षों में महाविद्यालय में मात्र स्नातक कक्षाओं का ही संचालन होता था। वर्ष 1982 से महाविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर पर समाजशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र की भी कक्षाएं आरंभ हुई। छात्र 2015-16 में महाविद्यालय को स्ववित्तपोषित योजना अंतर्गत परिषद स्नातक स्तर पर भूगोल, हिंदी, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी तथा उर्दू विश्व तथा स्नातक स्तर पर गृह विज्ञान, शिक्षा शास्त्र की कक्षाओं के संचालन की मान्यता प्राप्त हुई। सत्र 2015-16 से ही महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर वाणिज्य संकाय के संचालन की मान्यता भी प्राप्त हुई। सत्र 2019-20 से विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय के सभी स्ववित्तपोषी पाठ्यक्रमों को स्थाई मान्यता प्राप्त कर दी गई। महाविद्यालय दूर-दराज के छात्र-छात्राओं को उच्च कोटि की शिक्षा प्रदान कर उन्हें चौमुखी विकास के लिए समर्पित है। वर्तमान में

महाविद्यालय में लगभग 1600 विद्यार्थी अध्यनरत रहे हैं। महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य संकाय की शिक्षा की व्यवस्था है। महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर बा प्रथम वर्ष में प्रवेश हेतु हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, समाजशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल ,शिक्षा शास्त्र, शारीरिक शिक्षा, एवं गृह विज्ञान विषय में 1020 सीटें शासन द्वारा स्वीकृत है। इसके अतिरिक्त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षित सीटें शासन द्वारा बढ़ाई गई है। महाविद्यालय में 30000 से अधिक स्तरीय पुस्तकों, संदर्भ ग्रंथों, शोध पत्रिकाओं से सुसज्जित पुस्तकालय एवं वाचनालय, कंप्यूटर लैब, ऑडियो विजुअल सुविधाओं से सुसज्जित एक उच्च स्तरीय सेमिनार हॉल, बड़े स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए एक विशाल सभागार की भी सुविधा उपलब्ध है। महाविद्यालय में प्रतिवर्ष प्रत्येक विषय में विभागीय छात्र -परिषदों का गठन किया जाता है जिनके माध्यम से विभागीय सेमिनार/संगोष्टियां, शैक्षणिक क्विज, भाषण प्रतियोगिताएं, अतिथि व्याख्यान एवं शैक्षिक भ्रमण आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 17 व 18 फरवरी 2007 को महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एक द्वि-दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का आयोजन कराया गया। वर्ष भर के अनुशासित अध्ययन अध्यापन के उपरांत भय मुक्त नकल मुक्त एवं पारदर्शी वातावरण में विश्वविद्यालय परीक्षाओं का आयोजन इस महाविद्यालय की गौरवपूर्ण उपलब्धि रही है। महाविद्यालय में विद्यार्थी के शैक्षिक अस्तर के आंतरिक मूल्यांकन की समुचित व्यवस्था है। शिक्षार्थियों के ज्ञान के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न विभागों में विभिन्न विषयों पर सामूहिक चर्चा, व्याख्यान मालाएं, व संगोष्टियां आयोजित कराई जाती है। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, नेतृत्व कौशल, प्रबंधन क्षमता, तथा उनके ज्ञान का यथेष्ठ मूल्यांकन-विभागीय प्राध्यापको द्वारा समय-समय पर किया जाता है। महाविद्यालय द्वारा ऐसे आयोजनों में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु उन्हें पुरस्कृत भी दिया जाता है तथा आवश्यकता अनुसार उन्हें फीडबैक भी उपलब्ध कराया जाता है।

महाविद्यालय में प्रतिवर्ष 16 फरवरी को स्वर्गीय राजा गुलाब सिंह जी की जयंती 20 सितंबर को महाविद्यालय की संस्थापिका स्वर्गीय कृष्णा कुमारी जी की पुण्यतिथि तथा 10 दिसंबर को महाविद्यालय के पूर्व आजीवन अध्यक्ष स्वर्गीय कुंवर महिपाल सिंह जी की पुण्यतिथि के अवसर पर हवन/यज्ञ का का आयोजन कराया जाता है। 2012 से महाविद्यालय में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंध समिति के आजीवन अध्यक्ष कुंवर धीरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है